गांवों में अस्पतालों की आवश्यकता पर निबन्ध हिन्दी में

आज का यह निबंध गांवों में अस्पतालों की आवश्यकता पर निबन्ध हिन्दी में पर दिया गया हैं। आप इस निबंध को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। यहां पर दिया गया निबंध कक्षा (For Class) 5th, 6th, 7th, 8th, 9th, 10th और 12th के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त हैं। विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा और प्रतियोगिताओं के लिए इस निबंध से मदद ले सकते हैं।

गांवों में अस्पतालों की आवश्यकता पर निबन्ध हिन्दी में

भारत एक विशाल देश है। यह गाँवों के देश के रूप में जाना जाता है। इसका कारण है कि इसकी बहुसंख्यक जनता गाँवों में रहती हैं। इस देश की वास्तविक उन्नति इसके गाँवों की उन्नति में है। लेकिन, यह बड़े खेद की बात है कि इसके ग्रामीण सफाई के मामले में बड़े दयनीय अवस्थाओं में हैं। ग्रामीण अनेक बीमारियों से ग्रसित हैं। गाँवों में डॉक्टर, कम्पाउण्डर, नर्स, दाई और अस्पतालें नहीं हैं।

 

ग्रामीण लोग गरीब हैं। यदि वे बीमार पड़ते हैं तो बेबसी में मर जाते हैं। औरतें यह नहीं जानती हैं कि गर्भावस्था में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। गर्भावस्था में संतुलित आहार लेने का भी ज्ञान उन्हें नहीं है। उनमें अधिकांश पुराने रोगों से ग्रसित हैं। उनमें कुछ गर्भावस्था के दौरान या प्रसूति के समय मर जाती हैं। वे लोग मेडिकल सहायता लेने में असफल हो जाती हैं। उनके पति गरीब किसान हैं। वे शहर के अस्पतालों में उन्हें ले जाने का साहस नहीं करते। पुरुष लोग भी अनेक बीमारियों से ग्रसित हैं। उनके लिए गाँवों में चिकित्सकीय सुविधाएँ मौजूद नहीं हैं।

 

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इसलिए गाँवों में अस्पतालों की बड़ी आवश्यकता है। गाँवों में अस्पताल खोलकर सैकड़ों जानें बचायी जा सकती हैं। सरकार को इस समस्या को संजीदगी से लेना चाहिए। शायिकाओं के साथ अच्छे अस्पताल गाँवों में खुलने चाहिए। इन अस्पतालों में सुसज्जित महिला वार्ड भी होना चाहिए। योग्य डॉक्टर, कम्पाउण्डर, नर्स एवं दाई की नियुक्ति इन अस्पतालों में होनी चाहिए।

 

ग्रामीण लोग इतने गरीब हैं कि कभी-कभी दवा के अभाव में वे मर जाते हैं। गरीबी के कारण वे लोग दवा नहीं खरीद सकते। इसलिए गरीब मरीजों के लिए मुफ्त दवा देने को उचित व्यवस्था होनी चाहिए। डॉक्टर एवं अस्पताल के कर्मचारियों को मरीजों के साथ सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। ग्रामीणों को स्वास्थ्य एवं सफाई के नियमों को सिखलाना चाहिए। इस तरह बहुत-से रोगों की रोकथाम होगी।

 

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यह शुभ लक्षण है कि सरकार ने इस दिशा में उचित कदम उठाया है। लेकिन यह केवल सरकार का काम नहीं है कि वह इस समस्या पर सोचे। ग्रामीणों का भी कर्त्तव्य है कि वे इस कार्य में सरकार की मदद करें। धनी ग्रामीणों को गाँवों में अस्पताल खोलने हेतु आर्थिक सहयोग भी देना चाहिए। इस पवित्र कार्य के लिए लोगों से पैसा इकट्ठा करना चाहिए। ऐसे बहुत-से धनी लोग हैं, जो स्वयं गाँवों में अस्पताल चला सकते हैं। उन्हें गरीबों की भलाई के लिए यह कार्य करना चाहिए।