Akelepan Zindagi Dard Bhari Shayari

Akelepan Zindagi Dard Bhari Shayari | ज़िंदगी पर शायरी हिंदी में

Akelepan Zindagi Dard Bhari Shayari | ज़िंदगी पर शायरी | Dard Zindagi Sad Shayari | जिंदगी शायरी दो लाइन | Dard Bhari Zindagi Shayari | Zindagi Sad Shayari |

Akelepan Zindagi Dard Bhari Shayari

तरक्कियों के दौर में उसी का जोर चल गया
बनाके अपना रास्ता जो भीड़ से निकल गया
कहाँ तो बात कर रहा था खेलने की आग से
ज़रा सी आँच क्या लगी कि मोम सा पिघल गया।

 

मैं चाहता हूँ सुबुक-गाम इतमिनान से आये
तेरी खबर भी गुलाबो के दरमियान से आये
मैं जब भी जागूँ तो जागूँ तेरे हवाले से
कि सवेरा आये तो होकर तेरे मकान से आये.

 

मुसाफिरो का कोई ऐतबार मत करना
जहाँ कहा था वहाँ इंतज़ार मत करना
और मैं नींद हूँ मेरी हद है तुम्हारी पलकों तक
बदन जलाकर मेरा इंतज़ार मत करना।

 

खुद हाथ से फिर उसने सरे शाम लिखा है
चौखट पर चरागों से मेरा नाम लिखा है
दरियाँ में बहाता है जलाकर ये दिएँ कौन
बहते हुए पानी पर भी पैगाम लिखा है।

 

गम की दौलत मुफ्त लुटा दूँ बिलकुल नहीं
अश्कों में ये दर्द बहाँ दू बिलकुल नहीं
तूने तो औकात दिखा दी है अपनी
मैं अपना मेयार गिरा दू बिलकुल नहीं।

 

Akelepan Zindagi Dard Bhari Shayari

हमारे दिल पर क्या गुज़री है तुम्हे बताये क्या
भरोसा तो टूट गया हम भी टूट जाये क्या
हमारे चेहरे पर तुम दागों की तोहमत लगाते हो
हमारे पास भी है आयना तुम्हे दिखाये क्या.

 

कहाँ रखूँ तुम्हारे फरेबी दिल के खज़ाने को
कि मेरे घर में कोई अलमारी नहीं है
साथ देते है खुशियों से गमो की मुसीबत तक
हाथ पकड़कर फिर छोड़ने की बीमारी नहीं है।

 

कहाँ रखूँ तुम्हारे फरेबी दिल के खज़ाने को
कि मेरे घर में कोई अलमारी नहीं है
साथ देते है खुशियों से गमो की मुसीबत तक
हाथ पकड़कर फिर छोड़ने की बीमारी नहीं है.

 

एहसास मेरी रूह की गहराइयों में है
पाबंदे वफ़ा हूँ ये सफाई नहीं दूंगा
साये की तरह साथ रहूँगा मैं तुम्हारे
ये बात अलग है की दिखाई नहीं दूंगा।

 

चला था गलत राह पर मगर फिर लौट आया
तुम आये जिंदगी में तो उजाला लौट आया
और बुला रही थी मुझे खुशियाँ ज़माने की तेरी
याद के आ जाने से मैं रास्ते से लौट आया।

 

Akelepan Zindagi Dard Bhari Shayari

अब अपनी ही दहलीज़ पे चुपचाप खड़ा हूँ ,
सदियों का अक़ीदा हूँ मगर टूट चूका हूँ ,
अब अपना कोई अक्स भी पाओगे ना मुझमे ,
क्यूकी उम्मीद का सूरज था मगर डूब रहा हूँ ।

 

जिस्म फानी है सजाने की जरुरत क्या है,
हुस्न दुनिया को दिखाने की जरुरत क्या है ,
ऐसे आमाल करो की रूह से खुशबू आये,
इत्र कपड़ो पे लगाने की जरुरत क्या है।

 

बेवजह जिंदगी नहीं लेती है हिचक़िया,
इनका किसी की याद से रिश्ता जरूर है,
और तस्वीर मेरी देखकर रोता है ज़ार ज़ार,
उसको मेरी जुदाई का सदमा जरूर है ।

 

अभी कमी है बहुत तुझमे देख ऐसा कर ,
किसी बुज़ुर्ग की सोहबत में रोज बैठा कर,
और बहुत जरुरी पहचान अपने चेहरे की ,
कभी – कभी ही सही आयना तो देखाकर।

 

आँधियों से न बुझूं ऐसा उजाला हो जाऊँ;
तू नवाज़े तो जुगनू से सितारा हो जाऊँ;
एक बून्द हूँ मुझे ऐसी फितरत दे मेरे मालिक;
कोई प्यासा दिखे तो दरिया हो जाऊँ।

 

Akelepan Zindagi Dukh Bhari Shayari

तुमने तो कह दिया की मोहब्बत नहीं मिली,
मुझको तो ये भी कहने की मोहलत नहीं मिली,
तुमको तो खैर शहर के लोगो का खौफ था,
और मुझको अपने घर से इज़ाज़त नहीं मिली ।

 

चाँद ज़ब भी मेरे घर के ऊपर नज़र आता है
ना जाने क्यों मुझे तेरा ख्याल आता है
और मैं ज़ब भी देखता हूँ आयने मे
तो उसमे तेरा मासूम चेहरा नज़र आता है.

 

बड़ा मुश्किल सबक है कब किसी को याद होता है ,
ताल्लुक जो निभाता है वही बर्बाद होता है,
और सियासत में शराफत ढूढ़ने वाले भी पागल है ,
ये कब्रिस्तान है इसमें कोई आबाद होता है ।

 

यू हादसे तो बहुत है मेरी जिंदगी के साथ ,
लेकिन जो कल हुआ था वो मंजर बला का था,
तुम भी भुला दो तरके ताल्लुक का वाक़या,
मैं भी ये सोच लूँगा कि झोंका हवा का था।

 

जान दे सकता है क्या साथ निभाने के लिए,
हौसला है तो बढा़ हाथ मिलाने के लिए,
मैंने दीवार पर क्या लिख दिया खुद को एक दिन ,
तो बारिशे होने लगी मुझको मिटाने के लिए।

 

Akelepan Zindagi Dard Bhari Shayari

तन्हाइयों की कमाई से जाना पड़ेगा,
गहरी खाईयों से गुजर कर जाना पड़ेगा ।
करी है मोहब्बत ‘अंजुम’ ने एक नादान से,
दुनिया को भुला उसको प्यार जताना पड़ेगा ।

 

सौदागर आए है उनकी गलियों में कई,
सौदागरों की जुबान पर उनका नाम है ।
किंतु उनकी जुबां पर,
किसी सौदागर का नाम नहीं है..।

 

एक दौर रहा है गमगीन जिंदगी का गहरा,
अब सब भुलाकर उनकी याद में मुस्कुराना पड़ेगा,
मैं जिंदा रहूंगी तो सिर्फ उनके साथ रहूंगी
वरना जिंदा रहकर भी मौत का राज छुपाना पड़ेगा ।

 

ना जाने कैसा फूल आया था बागों में इस दिन,
उस फूल की जड़ें कुतर दी गई है किंतु,
मुरझाने का नाम नहीं है..।

 

दिन था अचानक रात हो गई तो मैं क्या करुँ
बिन मौसम ही बरसात हो गई तो मैं क्या करुँ
हमने तो उनका हाथ मज़बूती से पकड़ा था
उनके कदमो की चाल ही थम गई तो मैं क्या करूँ.

 

अच्छा किया जो आपने धोखा दिया मुझे ,
अब उम्र भर के वास्ते चौका दिया मुझे,
जिसको सँवारने में मेरी उम्र कट गई,
जब वो सँवर गया है तो उलझा दिया मुझे।

 

आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने कीI
लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं,
कौन पूछता है पिंजरे में बंद पंछियों को,
याद वही आते है जो उड़ जाते है.

 

तजल्लियों का नया दायरा बनाने में ,
मेरे चराग लगे है हवा बनाने में ,
अड़े थे जिद पे की सूरज बनाके छोड़ेगे ,
पसीने छूट गए एक दिया बनाने में ,
और ये लोग वो है जो बस्ती में सबसे अच्छे है ,
इन्ही का हाथ है मुझको बुरा बनाने में।