Balkrishna Bhatt Biography Hindi | बालकृष्ण भट्ट की जीवनी

Balkrishna Bhatt Biography in Hindi, बालकृष्ण भट्ट की जीवनी,इतिहास , शिक्षा, कहानी ,कविताये, माता-पिता , विशिष्ट अभिरुचि, परिवार (Balkrishna Bhatt ki jivani, history ,Age, Height, Father , family)

Balkrishna Bhatt Biography in Hindi

पूरा नाम बालकृष्ण भट्ट
जन्म 23 जून, 1844
निधन 20 जुलाई 1914
निवास-स्थान इलाहाबाद, उत्तरप्रदेश
माता-पिता पार्वती देवी एवं बेनी प्रसाद भट्ट । पिता एक व्यापारी थे और माता एक सुसंस्कृत महिला जिन्होंने बालकृष्ण भट्ट के मन में अध्ययन की रुचि एवं लालसा जगाई।
शिक्षा प्रारंभ में संस्कृत का अध्ययन, 1867 में प्रयाग के मिशन स्कूल से एंट्रेस की परीक्षा दी।
विशेष परिस्थिति पिता के निधनोपरांत पैतृक व्यापार संभालने के नाम पर गृहकलह का सामना । पैतृक घर छोड़कर घोर आर्थिक संकट से जूझते हुए हिम्मत से काम लिया और साहित्य के प्रति समर्पित रहे।
रचनाएँ
  • उपन्यास – रहस्य कथा, नूतन ब्रह्मचारी, सौ अजान एक सुजान, गुप्त वैरी, रसातल यात्रा, उचित दक्षिणा, हमारी घड़ी, सद्भाव का अभाव ।
  • नाटक – पद्मावती, किरातार्जुनीय, वेणी संहार, शिशुपाल वध, नल दमयंती या दमयंती स्वयंवर शिक्षादान, चंद्रसेन, सीता वनवास, पतित पंचम, मेघनाद वध, कट्टर सूम की एक नकल, वृहन्नला इंगलैंडेश्वरी और भारत जननी, भारतवर्ष और कलि, दो दूरदेशी, एक रोगी और एक वैद्य, रेल का विकट खेल, बालविवाह आदि ।
  • प्रहसन – जैसा काम वैसा परिणाम, नई रोशनी का विष, आचार विडंबन आदि । निबंध – 1000 के आस-पास निबंध जिनमें सौ से ऊपर बहुत महत्त्वपूर्ण । ‘भट्ट निबंधमाला’ नाम से दो खंडों में एक संग्रह प्रकाशित ।
रचनात्मक सक्रियता भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रेरणा से ‘हिंदी वर्द्धिनी सभा’ प्रयाग की ओर से 1877 में ‘हिंदी प्रदीप नामक मासिक पत्र निकालना प्रारंभ किया। इसे वे 33 वर्षों तक चलाते रहे । इसमें नियमित रूप से सामाजिक-साहित्यिक-नैतिक-राजनीतिक विषयों पर निबंध लिखते रहे। 1881 में वेदों की युक्तिपूर्ण समीक्षा की।

1886 में लाला श्रीनिवास दास के ‘संयोगिता स्वयंवर’ की कठोर आलोचना की। जीवन के अंतिम दिनों में ‘हिंदी बालकृष्ण भट्ट आधुनिक हिंदी गद्य के आदि निर्माताओं और उन्नायक रचनाकारों में एक हैं । शब्दकोश’ के संपादन के लिए श्याम सुंदर दास द्वारा काशी आमंत्रित, किंतु अच्छा व्यवहार न होने पर अलग हो गए।

Balkrishna Bhatt Biography in Hindi

वे भारतेंदु युग के प्रमुख साहित्यकारों में से हैं। वे हिंदी के प्रारंभिक युग के प्रमुख और महान पत्रकार, निबंधकार तथा हिंदी की आधुनिक आलोचना के प्रवर्तकों में अग्रगण्य हैं। उन्होंने आधुनिक हिंदी साहित्य को अपने प्रतिभाशाली जनधर्मी व्यक्तित्व और लेखन से एक नवीन धरातल, नवीन दिशा और नया रूप-रंग और मानस दिया।

निश्चय ही इस महत्तर युगांतरकारी कार्य में वे एकाकी नहीं थे, स्वयं भारतेंदु हरिश्चंद्र, प्रतापनारायण मिश्र, प्रेमघन, राधाचरण गोस्वामी जैसे अनेक महान साहित्यकार उनके साथ थे । किंतु यह एक सर्वसम्मत स्थापित मान्यता है कि अपने युग के सर्वाधिक सक्रिय, मुखर और प्रदीर्घ समय तक सुदृढ़ निष्ठा के साथ तेजस्वी लेखन द्वारा साहित्य सेवा करते रहने वाले समर्पित साहित्यकार थे बालकृष्ण भट्ट।

भारतेंदु युग के दो-तीन प्रमुख साहित्यकारों में एक, जिनके अनवरत लेखन से भारतेंदु युग का रचनात्मक युग-व्यक्तित्व निर्मित हुआ तथा आगे के द्विवेदी युग का मूलाधार निर्मित हो सका । साहित्य केवल कल्पना-विलास और मनोरंजन की वस्तु नहीं है, अपितु वह ‘जन समूह व चित्त के विकास का संवाहक’ और जन संस्कृति के विकास प्रवाह का मूर्त वाङ्मय उपादान है जो गहन लोक संपत्ति से उपजता और दिशा पाता है – यह बोधपूर्ण प्रधान मान्यता भारतेंदु युग के साहित्य से बनती है और इसके द्रष्टा जों मे बालकृष्ण भट्ट प्रमुख हैं।

आधुनिक हिंदी नवजागरण और राष्ट्रीय आंदोलन के दौर में नए सिरे से अपनी भाषः और साहित्य की मौलिक लोकवादी प्रकृति एवं जातीय निष्ठा की पहचान करते हुए तदनुरूप दिशा और प्रवाह देने का कार्य जिन महान लेखकों ने अपनी रचनात्मक गतिविधियों द्वारा संपन्न किया उनमें भट्ट जी विशेष रूप से स्मरणीय हैं।

बालकृष्ण भट्ट गद्यकार थे। अपनी अभिरुचि, मानस और प्रतिभा से, परिवेश और यथार्थ से संपूर्ण सरोकार रखनेवालें लेखक-पत्रकार। उनके गद्य की भाषा और कला की जड़ें भी परिवेश और यथार्थ में ही थीं । लोक व्यवहार में, बोलचाल-बातचीत और अभिव्यक्ति में मूर्त भाषा और कला ही उनके गद्य का कलेवर बन जाती है ।

वह नवजागरण और स्वाधीनता संघर्ष का दौर था जिसमें भीतरी और बाहरी, स्वदेशो और विदेशी शक्तियों से टकराव और संघर्ष ही जागरूक गद्य लेखक की नियति थी । यह टकराव और संघर्ष भट्ट जी के लेखन में आंतरिक दृढ़ता, तेज और तेवर बनकर उभरता है । भट्ट जी ने ‘हिंदी प्रदीप’ में पूरे-अधूरे अनेक उपन्यास लिखे, नाटक और प्रहसन लिखे, किंतु निबंध ही उनकी वह अपनी विधा है जिसमें उनका अभिप्रायपूर्ण सोद्देश्य लेखन पूरी शक्ति-सामर्थ्य और वैभव के साथ प्रकट हुआ है।

सामयिक समस्याओं पर उन्होंने जमकर लिखा है । बाल विवाह, स्त्री शिक्षा, महिला स्वातंत्र्य, राजा-प्रजा, कृषकों को दुरवस्था, अंग्रेजी शिक्षा, सुशिक्षितों में परिवर्तन, देश सेवा, अंधविश्वास आदि विषयों पर उन्होंने खूब लिखा। विविध मनोभावों और भाषा-साहित्य के विषयों पर भी खुलकर लिखा । व्यक्तित्व व्यंजक, आत्मपरक, कलात्मक निबंध भी उन्होंने इतने लिखे कि उनकी संख्या सैकड़ों में है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने निबंधकार के रूप में उन्हें अंग्रेजी साहित्य के एडीसन और स्टील की श्रेणी में रखा है।

“यहाँ प्रस्तुत ‘बातचीत’ शीर्षक निबंध उनके निबंधकार व्यक्तित्व और निबंधकला के साथ-साथ भाषा-शैली का भी प्रतिनिधित्व करता है। प्रस्तुत निबंध भट्ट जी के बारे में ऊपर कही गई बातों को सहज ही पुष्ट और प्रमाणित करता है। उनकी वास्तविक प्रतिभा एक अध्ययनशील विद्वान और तीक्ष्ण बुद्धि आलोचक की है। उन्हें आधुनिक हिंदी आलोचना का जन्मदाता कहना अनुचित न होगा। धर्म और दर्शन को सामाजिक विकास की कसौटी पर कसकर बालकृष्ण भट्ट ने प्रगतिशील आलोचना की नींव डाली थी।” -रामविलास शर्मा शिकार तिला

Mukul Dev

मेरा नाम MUKUL है और इस Blog पर हर दिन नयी पोस्ट अपडेट करता हूँ। उमीद करता हूँ आपको मेरे द्वार लिखी गयी पोस्ट पसंद आयेगी।