दूरदर्शन और युवावर्ग पर निबंध | Doordarshan Essay in Hindi

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आज का यह निबंध दूरदर्शन और युवावर्ग पर निबंध (Doordarshan Essay in Hindi) पर दिया गया हैं आप इस निबंध को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। यहां पर दिया गया निबंध कक्षा (For Class) 5th, 6th, 7th, 8th, 9th, 10th और 12th के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त हैं। विद्यार्थी परीक्षा और प्रतियोगिताओं के लिए इस निबंध से मदद ले सकते हैं।

Doordarshan Essay in Hindi

Doordarshan Essay in Hindi

भूमिका : दूरदर्शन आधुनिक युग का क्रांतिकारी आविष्कार है। बटन दबाइए और तेंदुलकर को छक्का मारते, नाडाल को गेंद उछालते तथा ओबामा को भाषण देते देखिए। हजारों मील की दूरी समाप्त! ऐसा है दूरदर्शन।

 

आविष्कार : टेलीविजन का आविष्कार बहुत पुराना नहीं है। इसका इजाद ब्रिटेन के जॉन एल० बेयर्ड ने किया और थोडे समय में संसार के विकसित देशों में टेलीविजन का प्रचार इतना अधिक बढ़ गया है कि वहाँ प्रत्येक घर में टेलीविजन सेट रखना आम बात है। भारत में इसकी शुरुआत 15 सितम्बर, 1959 ई० को हुई। आज लगभग 300 से अधिक प्रसारण केन्द्र हैं और अनेक स्टुडियो। अब इतने अधिक शक्तिशाली ट्रांसमीटर लगा दिये गये हैं कि टेलीविजन का प्रसारण दूरवर्ती क्षेत्रों में भी होने लगा है।

 

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ज्ञान और मनोरंजन का संगम : दूरदर्शन ज्ञान-प्रसार, मनोरंजन तथा प्रचार का सबसे सशक्त माध्यम है। अनेक जटिल पाठ्यक्रम आसानी से दिखाकर समझाए जा सकते हैं। यह अच्छी बात है कि विद्यार्थियों के लिए अलग से कार्यक्रम होते हैं। घर-गृहस्थी एवं स्वास्थ्य की बातें बताई जाती हैं और समाचार सुनाए जाते हैं। समुद्रतल की जानकारी और चन्द्रमा विजय पर भी दूरदर्शन की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। स्वस्थ मनोरंजन का भी यह सर्वोच्च माध्यम है। व्यापारी अपने उत्पादन की जानकारी इसके द्वारा करोड़ो लोगो तक पहुँचा सकते हैं। नेता अपनी बात देश की सारी जनता को बता सकते हैं।

 

वरदान, अभिशाप : लेकिन इसका एक काला पक्ष भी है। ज्ञान प्राप्ति की अपेक्षा केवल मनोरंजन के लिए युवा पीढ़ी इसका उपयोग करने लगी है। कुछ प्रसारक अक्सर अपने कार्यक्रम में फूहड़ कार्यक्रम दिखाते हैं जिससे अपुष्ट मन प्रभावित होता है। बस, लोग इससे चिपके जा रहे हैं। नतीजा है कि संस्कृति और भाषा दूषित होने लगी है, लोग अपने समाज से कटने लगे हैं। अधिक देखने से इसका आँखों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।

 

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उपसंहार:  टेलीविजन और रेडियो में बहुत अधिक समानता है। रेडियो प्रसारण में वक्ता या गायक स्टुडियो में अपनी वार्ता या गीत प्रस्तुत करता है, उसकी आवाज से हवा में तरंगें उत्पन्न होती हैं जिन्हें उसके सामने रखा हुआ माइक्रोफोन बिजली की तरंगों में बदल देता है। इन बिजली की तरंगों को भूमिगत तारों के द्वारा शक्तिशाली ट्रांसमीटर तक पहुँचाया जाता है, जो उन्हें रेडियो तरंगों में बदल देता है। इन तरंगों को टेलीविजन एरियल पकड़ लेता है। टेलीविजन के पुर्जे इन्हें बिजली तरंगों में बदल देते हैं। फिर उसमें लगे लाऊडस्पीकर से ध्वनि आने लगती है और हम कैमरे के सामने हो रही घटनाएँ अपने घर में देखने लगते हैं।

Mukul Dev

मेरा नाम MUKUL है और इस Blog पर हर दिन नयी पोस्ट अपडेट करता हूँ। उमीद करता हूँ आपको मेरे द्वार लिखी गयी पोस्ट पसंद आयेगी।