सह-शिक्षा पर निबंध | Essay on Co-Education in Hindi

आज का यह निबंध सह-शिक्षा पर निबंध (Essay on Co-Education in Hindi) पर दिया गया हैं। आप इस निबंध को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। यहां पर दिया गया निबंध कक्षा (For Class) 5th, 6th, 7th, 8th, 9th, 10th और 12th के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त हैं। विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा और प्रतियोगिताओं के लिए इस निबंध से मदद ले सकते हैं।

Essay on Co-Education in Hindi

Essay on Co-Education in Hindi

एक ही विद्यालय या महाविद्यालय में लड़के एवं लड़कियों को एकसाथ शिक्षा देना सह-शिक्षा कहलाता है। स्त्री एवं पुरुष की विकसित मानसिकता एवं आपसी समझ-बूझ समय की माँग है। आज स्त्री एवं पुरुष को आपस में हाथ मिलाकर कार्य करना है। सह-शिक्षा सर्वोत्तम पद्धति है जो लड़के एवं लड़कियों को एक-दूसरे को जानने-समझने के योग्य बनाती है। यह उनके आत्मविश्वास को बढ़ाता है। इसके द्वारा वे लोग व्यावहारिक दुनिया में जीना सीखते हैं।

 

सह-शिक्षा समाज के लिए उन्हें उपयोगी बनाती है। आज स्त्रियाँ केवल चुल्हे-चौका और सुई-धागे तक ही नहीं बँधी हैं। वे लोग पुरुषों की तरह बाहर भी कार्य कर रही हैं। समय तेजी से बदला है। ऐसे बदलते समय में सह-शिक्षा अहम भूमिका अदा करती है। यह उन्हें एकसाथ कार्य करने के लिए तैयार करती है।

 

लड़के एवं लड़कियों को शिक्षा पाने का समान अधिकार है। उनके लिए अलग-अलग स्कूल और कॉलेज खोलना कठिन कार्य है। नि:संदेह, उनके लिए कुछ अलग-अलग स्कूल एवं कॉलेज हैं। लेकिन उनकी संख्याएँ आवश्यकता के अनुसार नहीं हैं। विद्यार्थियों की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है। उनकी बढ़ती संख्या को देखते हुए सह-शिक्षा ही समाधान है।

 

कुछ लोग सह-शिक्षा के विरोधी हैं। इसके विरुद्ध उनकी अपनी दलीलें हैं। वे लोग युवा लड़के एवं लड़कियों को एकसाथ रखने के पक्ष में नहीं हैं। वे लोग इसे समाज के लिए अहितकर मानते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि लड़के एवं लड़कियों की शिक्षा एक तरह की नहीं होनी चाहिए। उनके मत में लड़कियों को दूसरी तरह की शिक्षा देनी चाहिए।

 

मिला-जुलाकर सह-शिक्षा में गुण एवं दोष दोनों हैं। लेकिन यह पद्धति सफल सिद्ध हुआ है। सह-शिक्षा वाले संस्थानों में विद्यार्थियों को अनुशासन का पालन करना चाहिए। उन्हें अच्छे आचरण अवश्य सीखना चाहिए। यदि विद्यार्थी अच्छे आचरण वाले हैं, तो सह-शिक्षा बहुत उपयोगी है।