ईद-उल-फितर पर निबंध | Essay on Eid UL Fitr in Hindi

आज का यह निबंध ईद-उल-फितर पर निबंध (Essay on Eid UL Fitr in Hindi) पर दिया गया हैं आप इस निबंध को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। यहां पर दिया गया निबंध कक्षा (For Class) 5, 6, 7, 8,9.10 और 12 के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त हैं। विद्यार्थी परीक्षा और प्रतियोगिताओं के लिए इस निबंध से मदद ले सकते हैं।

 

Essay on Eid UL Fitr in Hindi

 

हमारा देश धर्मों की विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ सभी धर्मों तथा सम्प्रदायों के लोग ‘भारतीय’ होकर रहते हैं और अपने-अपने ढंग तथा रीति-रिवाजों से भगवान का स्मरण करते हैं। इस तरह यह देश धर्म प्रधान है। यहाँ हिन्दुओं के अपने त्योहार हैं, मुसलमानों के अपने। सिक्खों के अपने अलग त्योहार है तो ईसाइयों तथा पारसियों आदि के अपने किसी-न-किसी दिन किसी-न-किसी धर्म या सम्प्रदाय का कोई-न-कोई त्योहार होता ही है। इसीलिए यदि कहा जाए कि भारत में वर्ष भर त्योहारों का सिलसिला चलता रहता है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

 

ये भी पढ़े:- यदि मैं प्रधानमंत्री होता पर निबंध हिन्दी में

 

मनाने की विधि ईद के पवित्र त्योहार का संबंध मुसलमानों के पैगम्बर मोहम्मद साहब से है। मोहम्मद साहब ने संसार में इस्लाम धर्म चलाया था। उन्होंने बताया कि ईद में एक साथ नमाज पढ़नी चाहिए और एक-दूसरे से गले मिलना चाहिए। इस अवसर पर घर-घर मीठी सेवइयाँ पकती हैं। सब सेवइयाँ खाते हैं तथा अपने दोस्तों तथा रिश्तेदारों में बाँटते हैं। इस ‘ईद-उल-फितर’ ईद को ‘मीठी ईद’ कहकर पुकारते हैं। ईद के अवसर पर हमारे देश के हिन्दू अपने मुसलमान भाइयों से गले मिलकर उन्हें ‘ईद मुबारक’ देते हैं और एक साथ बैठकर सेवइयाँ खाते हैं। यह त्योहार बन्धुत्व तथा प्रेम भावना में बढ़ावा लाने का त्योहार है।

 

ईद और चाँद-दर्शन बहुत सारे मुसलमान भाई ईद के उपलक्ष्य में एक महीने के रोजे रखते हैं। इस तरह रमजान के पूरे तीस रोज के बाद यह त्योहार आता है। रोजे के दिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त होने तक रोजा रखने वाले लोग न कुछ खाते हैं और न ही पानी ही पीते हैं। रोजा के तीस दिन की लम्बी अवधि के बाद जब चाँद के दर्शन के लिए लम्बी प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इसीलिए ‘ईद का चाँद होना’ मुहावरे को लोक जीवन में प्रचलन हो गया है।

 

ये भी पढ़े :- मित्रता पर निबंध हिन्दी में ….

 

एकता और समता का त्योहार ईद हमारे देश का महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन राष्ट्रीय अवकाश रहता है। हम सब हिन्दू, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई तथा बौद्ध ईद के त्योहार को राष्ट्रीय एकता के त्योहार के रूप में मानते हैं। इस दिन न कोई छोटा माना जाता है और न ही बड़ा। सब समान माने जाते हैं। इस तरह ईद का त्योहार समता तथा मानवता का प्रतीक है।

 

उपसंहार ईद का त्योहार आपसी प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश देता है। हमें, इसे अत्यंत प्रेम भाव से मनाना चाहिए। इससे राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत होती है तथा हमारे देश का धर्मनिरपेक्ष स्वरूप और भी दृढ़ होता है।