मित्रता पर निबंध 2021 | Essay On Friendship in Hindi

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आज का यह निबंध मित्रता पर निबंध 2021 (Essay On Friendship in Hindi) पर दिया गया हैं आप इस निबंध को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। यहां पर दिया गया निबंध कक्षा (For Class) 5, 6, 7, 8,9.10 और 12 के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त हैं। विद्यार्थी परीक्षा और प्रतियोगिताओं के लिए इस निबंध से मदद ले सकते हैं।

Essay On Friendship in Hindi

सच है, मित्रता अनमोल धन है, अतुलनीय है। जिसे सच्चा मित्र मिल जाता है, उसका हर दुख आधा हो जाता है। मनुष्य जब संसार-सागर में उतरता है तो उसे बहुत लोग मिलते हैं। किसी की अदा निराली होती है, किसी का रंग-रूप, किसी की बातें और किसी की दरियादिली। युवा मन इन्हीं में से किसी पर फिदा हो जाता है और उसे मित्र बना लेता है। ऐसे लोग शायद ही मित्रता निभाते हैं। अधिकतर मतलबी होते हैं, कुछ दिन मौज-मस्ती की और खिसके।

 

वस्तुतः सच्ची मित्रता वहीं होती है, जहाँ विचारों की एकता होती है। इसमें समृद्धि, निर्धनता , जाति-पाँति आड़े नहीं आती। कृष्ण राजा थे, सुदामा निर्धन फिर भी दोनों में गाढ़ी मित्रता थी। इसी प्रकार, राम और सुग्रीव गाढ़े मित्र थे। कहते हैं महाकवि तुलसी और कविवर रहीम भी मित्र थे।
कभी विपरीत विचारों वालों में भी मित्रता हो जाती है क्योंकि हम चाहते हैं कि जो गुण हममें नहीं है, उस गुणवाला कोई मिल जाए। राम शान्त स्वभाव के थे किन्तु भावावेश में आने वाले लक्ष्मण को वे बहुत चाहते थे। चिन्तन प्रिय व्यक्ति प्रफुल्ल चित्त वाले को, निर्बल बलवान को और वीर उत्साही को खोजता है। वस्तुतः सच्चे मित्र में उत्तम वैद्य की सी निपुणता और परख होती है।

 

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जैसे वैद्य अपनी औषधि से शरीर के विकार को निकाल देता है, वैसे ही सच्चा मित्र अपनी सलाह से अपने मित्र को दुगुणों से बचाता, संकट में उसकी रक्षा करता और दुर्दिन में उसकी सहायता करता है। रामचन्द्र शुक्ल की दृष्टि में सच्चे मित्र में माता-सा धैर्य और कोमलता होती है। सच्चा मित्र आनन्द को दुगुना और दुख को आधा कर देता है।

 

इसलिए किसी से मित्रता बहुत सोच-विचार कर, जाँच-परख कर करनी चाहिए। मुँह के सामने प्रशंसा और पीठ पीछे बुराई करनेवालों से सदा सचेत रहना चाहिए। सुविधा से अपना काम निकाल कर खिसक जानेवाले लोग बहुत मिलते हैं, वे मित्र नहीं होते, मतलबी होते हैं। कहा है
मतलबी यार किसके? काम निकला और खिसके।

 

सच्ची बात तो यह है कि मित्रता दैवी देन है और मनुष्य के लिए वरदान। यही कारण है कि सच्चे मित्र बहत नहीं होते।
सच्चा मित्र जीवन में एक वरदान है। वह भूले-भटके को राह दिखाता और मित्र की सोई किस्मत को जगाता है।

Mukul Dev

मेरा नाम MUKUL है और इस Blog पर हर दिन नयी पोस्ट अपडेट करता हूँ। उमीद करता हूँ आपको मेरे द्वार लिखी गयी पोस्ट पसंद आयेगी।