मेरा प्रिय कवि तुलसीदास पर निबंध | Essay on Goswami Tulsidas in Hindi

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आज के इस पोस्ट में मेरा प्रिय कवि तुलसीदास पर निबंध (Essay on Goswami Tulsidas in Hindi) पर निबंध दिया गया हैं। आप Essay on Goswami Tulsidas in Hindi को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। यहां पर दिया गया निबंध कक्षा (For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8,9.10 और 12 के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त हैं।

Essay on Goswami Tulsidas in Hindi

कागज के पन्नों को तुलसी तुलसीदल जैसा बन गया। – मानस पर उक्ति

लगभग पाँच सौ वर्षों की कालधारा जिस कवि की कृति को धूमिल न कर पाई, वह कवि हैं गोस्वामी तुलसीदास। तुलसीदास का आविर्भाव उस समय हुआ, जिस समय हिन्दू-जाति विधर्मियों के अत्याचार से त्राहि-त्राहि कर रही थी। निराशा के इस काल में इन्होंने कुण्ठितों के बीच आशा का संचार किया और भक्ति का दीप जलाकर पथ उजागर किया।

 

तुलसी का जन्म सम्वत् 1554 में उत्तर प्रदेश के राजापुर नामक गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम आत्माराम दुबे एवं माता का नाम हुलसी था। कहा जाता है कि मूल नक्षत्र में जन्म लेने के कारण माता-पिता ने उनका त्याग कर दिया। फलतः इनका बाल्यकाल अत्यंत दु:खमय रहा।

 

गुरु नरहरि दास की कपा ने इन्हें रामबोला से तलसीदास बना दिया। शेष सनातन जी से शिक्षा ग्रहण करने के बाद तुलसीदास की रत्नावाली से शादी हुई। पली पर मुग्ध तुलसी एक बार बिन बुलाए ससुराल पहुंच गए। रत्नावली ने लोकलाजवश इन्हेंकड़ी झिड़की दी। बस, इस झिड़की से आसक्ति भक्ति में बदल गई। विरक्त हो, तुलसी ने मानसरोवर से सेतुबन्ध तक की यात्रा की तथा अपने जीवन को राममय बना लिया।

 

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राम के रंग में रंग कर तुलसी ने अनेक ग्रंथों की रचना की, यथाकवितावली, दोहावली, गीतावली, रामलला नहछू, वैराग्य संदीफ्नी, जानकी-मंगल, पार्वती-मंगल, विनय-पत्रिका और रामचरितमानस। तुलसी का व्यक्तित्व अनोखा है। इनके समक्ष कबीर, जायसी एवं सूरदास सबके सब फीके पड़ गये क्योंकि कबीर ने सधुक्कड़ी भाषा में, जायसी ने अवधी में और सूरदास । ने जजभाषा में रचनाएँ की किंतु तुलसी ने दोनों भाषाओं में अपनी रचना कर सबों को पीछे छोड़ दिया। इनकी रचनाओं में रस, अलंकार एवं छन्द स्वतः आ गये हैं, इसीलिए तो हरिऔध जी ने कहा है “कविता पा तुलसी न लसे, कविता.लसी पा तुलसी की कला।

 

तुलसी परिस्थिति-विशेष की ऊपज थे। इस समय हिन्दू-जाति भयंकर यंत्रणा से गुजर रही थी। इन्होंने अपने विशेष महाकाव्य ‘रामचरितमानस’ एवं “विनयपत्रिका’ की रचना कर, भक्ति की गंगा बहाकर सबको मुग्ध किया एवं बिखरी हिन्दू-जाति को एकता का पाठ पढ़ाया तथा सारे सम्प्रदायवादी विचारों का अन्त कर एक नयी दिशा दी।

 

मेरा प्रिय कवि तुलसीदास पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay on Goswami Tulsidas in Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए प्रयोग में ला सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी महत्वपूर्ण विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे, जिन्हे आप पढ़ सकते है। पोस्ट अच्छी और ज्ञान पूर्वक लग रहा है तो शेयर करे और कमेन्ट में बताये की कैसी लगी।

Mukul Dev

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