पंचायती राज या ग्रामपंचायत निबंध | Essay on Gram Panchayat in Hindi

आज का यह निबंध पंचायती राज या ग्रामपंचायत पर निबंध (Essay on Gram Panchayat in Hindi) पर दिया गया हैं। आप इस निबंध को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। यहां पर दिया गया निबंध कक्षा (For Class) 5th, 6th, 7th, 8th, 9th, 10th और 12th के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त हैं। विद्यार्थी परीक्षा और प्रतियोगिताओं के लिए इस निबंध से मदद ले सकते हैं।

Essay on Gram Panchayat in Hindi

पंचायती राज या ग्रामपंचायत कुशल प्रशासन के लिए सत्ता का विकेन्द्रीकरण आवश्यक है। भारत एक बड़ा राष्ट्र है। और साथ ही यह गाँवों का देश है। इसके गाँवों के विकास के बगैर इस देश का विकास नहीं हो सकता। आज भी बहुसंख्यक आबादी गाँवों में रहती हैं।

 

प्राचीन भारत में ग्रामपंचायत न केवल लोकप्रिय, बल्कि बहुत मजबूत स्थिति में था। यह गाँवों की देखभाल करता था। ग्रामीण लोग खुशहाली का जीवन जीते थे। उन दिनों शांति. खुशहाली और भाईचारा गाँवों के मुख्य आकर्षण थे। लेकिन, समय के साथ, ग्रामपंचायत का महत्त्व समाप्त हो गया।

 

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बदलते समय के साथ, भारत सरकार ने ग्रामपंचायत को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता महसूस की । स्वतंत्र भारत में ग्रामपंचायत की पनर्स्थापना की गयी। पंचायत की स्थापना गाँव की जनसंख्या के आधार पर की गयी । एक बड़े गाँव का एक पंचायत बना । यदि गाँव छोटा हुआ तो दो या अधिक गाँवों को मिलाकर एक पंचायत बनाया गया।

 

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आज भी ग्रामपंचायतों का वही स्वरूप चल रहा है। ग्रामपंचायत के दो अंग होते हैं। पहला अंग कार्यपालिका है, जिसका प्रधान मुखिया होता है। दूसरा अंग न्यायपालिका है, जिसका प्रधान सरपंच होता है। मुखिया और सरपंच का चुनाव होता है। गाँव के सभी वयस्क लोग मतदाता होते हैं। चुने गये सदस्यों का एक कार्यकारिणी भी होता है। यह कार्यकारिणी समिति मुखिया को उसके कार्यों में सहयोग करती है।

 

उसी प्रकार चुने गये पंच होते हैं, जो सरपंच को सहयोग करते हैं। सरकार द्वारा नियुक्त एक ग्रामसेवक भी होता है। वह पंचायत के दस्तावेजों को रखता है और दैनिक कार्यों को करता है। अब ‘सचिव’ और ‘न्यायमित्र’ भी नियुक्त किये जाते हैं। न्यायमित्र ग्रामीणों के झगड़े के निपटारे में सरपंच की मदद करता है।

 

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ग्रामपंचायत को संविधान के द्वारा बहुत-सी शक्तियाँ प्रदान की गई हैं। यह स्वास्थ्य, सफाई, शिक्षा, कृषि, सडक, तालाब, बाजार और अन्य कार्यों को गाँव की उन्नति के लिए करता है। अब शिक्षकों की नियक्ति भी ग्रामपंचायतों के द्वारा हो रही है। ग्रामपंचायत बहुत उपयोगी है। लेकिन, कभी-कभी यह अपने उद्देश्यों को पूरा करने में असफल हो जाती है। मुखिया और सरपंच अपनी शक्ति का दुरुपयोग करने लगते ग्रामपंचायत गंदी राजनीति, जातीयता और पक्षपात का केन्द्र बन जाता है। ग्रामपंचायत की सफलता ग्रामीणों की जागरूकता पर निर्भर करती है।

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