भारतीय नारी पर निबंध | Essay on Indian Women in Hindi

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आज का निबंध भारतीय नारी पर निबंध (Essay on Indian Women in Hindi) पर दिया गया हैं आप इस Essay को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। यहां पर दिया गया निबंध कक्षा (For Class) 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 और 12 के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त हैं। इस निबंध, भाषण, अनुच्छेद में भारत की नारी कल और आज प्राचीन काल बनाम वर्तमान की स्थिति के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा करेगे.

Essay on Indian Women in Hindi

भूमिका – भारत में नारी को देवी के रूप में देखा जाता है। नारी का हृदय धरा समान होता है। अनेक कष्ट सहकर भी वह पुरुष को कष्ट नहीं होने देती है।

प्राचीन काल में अनुसूया, लीलावती, मैत्रयी, अत्री, गार्गी आदि नारियों के अस्तित्व को देखते हुए कहा जा सकता है कि वेदिक युग में हमारे देश की नारियाँ उच्च शिक्षित थीं सभी मांगलिक कार्य नारी बिन अधूरा है।

देवताओं ने भी नारी का सम्मान किया है। तभी तो कहा गया है “वन नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते ला देवता जहाँ नारी पूजी जाती है वहीं देवता भी निवास करते हैं।

 

ऐतिहासिक स्थिति – मध्यकाल में भारत में मुसलमानों का आना शुरू हुआ। सामाजिक बदलाव अचानक हो गया। मुसलमानों ने आक्रमण करना शुरू कर दिया। उनका उद्देश्य धन लूटना और सुन्दर युवा नारियों का अपहरण करना था।

पराजित हिन्दुओं को असुरक्षा अनुभव होने लगी। अत: स्त्रियाँ अपनी मान-मर्यादा की रक्षा के लिए पर्दे में रहने लगीं। सतीत्व की रक्षा के लिए घर में बन्द हो गईं।

लेकिन इस बीच भी रानी लक्ष्मीबाई, ताराबाई, दुर्गावती, लीलावती देवी, अहिल्याबाई, करूणावती और कलावती जैसी महान नारियों ने नारीत्व की समृद्ध परम्परा को बनाए रखा।

पूर्व में रूढ़ीवादी समाज में कुछ कष्टकर स्थिति उत्पन्न होती थी। लेकिन 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में नारी जागरण एक आन्दोलन के रूप में शुरू हुआ। सर्वश्री राजाराम मोहन राय, महात्मा गाँधी, दयानन्द सरस्वती आदि ने इसमें महती भूमिका निभाई।

 

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अन्य देशों से तुलना – आज की भारतीय नारी केवल चहारदीवारी के अन्दर बन्द केवल बच्चे पैदा करने की मशीन नहीं है बल्कि पुरुष के कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए कुलबुला रही है।

दयानन्द सरस्वती ने शिक्षित नारी, सबल नारी का सपना देखा था। स्वामी की कृपा से वह फलीभूत हुआ। गाँधीजी ने स्वतंत्रता आन्दोलन में भी नारियों को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की प्रेरणा दी। पाश्चात्य देशों में नारियों को सम्मान दिया जाता है। उचित शिक्षा दी जाती है।

मुस्लिम देशों में कुछ कट्टरपंथी नारियों को अशिक्षित रखना चाहते हैं एवं केवल भोग की वस्तु मात्र समझते हैं। हमारे भी देश में यदि नारी को उचित मौका दिया जाए तो देश का विकास तेजी से होगा। कवि की यह पंक्तियाँ कि

“अब्बला जीवन डाय तेरी यही कहाली,
   है आँचल में दूध, और आँखों में पानी।”

अब नहीं चलना चाहिए।

 

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नारी शिक्षा आवश्यक – अब नारियाँ शिक्षित हो रही हैं। सरकारी स्तर पर भी काफी प्रयास किए जा रहे हैं। सती प्रथा, बाल-विवाह, पर्दा प्रथा, धनाभाव में बालिकाओं और किशोरियों का वृद्ध व्यक्तियों से बेमेल विवाह आदि समाप्त प्राय है और शिक्षा पर बल दिया जा रहा है।

मुफ्त ऊँची शिक्षा, सायकिल, वस्त्र, छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन राशि देकर सरकारी योजनाओं के माध्यम से नारी शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। आज का शहर ही नहीं बल्कि छोटे शहर, कस्बे तथा गाँवों तक शिक्षा का अलख जगाया जा रहा है। जिसमें नारियों से कोई भेद नहीं किया जा रहा है।

उपसंहार – कभी-कभी समाज में छिटपुट शर्मनाक घटनाएँ घट जाती है। जो सर्वकालिक और सर्वदेशिक है। परन्तु आवश्यकता इस बात की है कि नारियाँ जब उच्च शिक्षित होंगी, तभी हमारे देश का उन्नयन तीव्र गति से होगा। नारी के इस महत्व को देखते हुए ही तो कहा है-

” नारी तुम केवल श्रद्धा रहो, विश्वास रजत नभ पग तल में,
पीयूष स्रोत सी बहा करो, जीवन के सुन्दर समतल में। “

Mukul Dev

मेरा नाम MUKUL है और इस Blog पर हर दिन नयी पोस्ट अपडेट करता हूँ। उमीद करता हूँ आपको मेरे द्वार लिखी गयी पोस्ट पसंद आयेगी।