राष्ट्रभाषा हिन्दी पर निबन्ध | Essay on National Language in Hindi

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आज का यह निबंध राष्ट्रभाषा हिन्दी पर निबन्ध (Essay on National Language in Hindi) पर दिया गया हैं आप इस निबंध को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। यहां पर दिया गया निबंध कक्षा (For Class) 5, 6, 7, 8,9.10 और 12 के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त हैं। विद्यार्थी परीक्षा और प्रतियोगिताओं के लिए इस निबंध से मदद ले सकते हैं।

Essay on National Language in Hindi

Essay on National Language in Hindi

आरम्भ : राष्ट्रभाषा का अर्थ है राष्ट्र की भाषा अर्थात ऐयी. जिसका प्रयोग देश की हर भाषा के लोग आसानी से कर सकें बोल और लिख सकें। हमारे देश की ऐसी भाषा है, हिन्दी। आजादी के पहले और सरकार ने अंग्रेज के माध्यम से सारा काम चलाया किन्तु अपने देश में लिए एक भाषा का होना आवश्यक है, ऐसी भाषा जो अपने देश की हो भाषा केवल हिन्दी ही है।

पक्ष में तथ्य : हिन्दी को संस्कृत की बड़ी बेटी कहते हैं। हिन्दी का प्रमाण गुण यह है कि यह बोलने, पढ़ने, लिखने में अत्यन्त सरल है। हिन्दी के प्रति विद्वान जॉर्ज ग्रियर्सन ने कहा है कि हिन्दी व्याकरण के मोटे नियम केवल एक पोस्टकार्ड पर लिखे जा सकते हैं। संसार के किसी भी देश का व्यक्ति कछ ही समय के प्रयत्न से हिन्दी बोलना और लिखना सीख सकता है। इसकी दूसरी विशेषता है कि यह भाषा लिपि के अनुसार चलती है। इसमें जैसा लिखा जाता है, वैसा ही बोला जाता है।

इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि संसार की लगभग सभी भाषाओं के शब्द इसमें घुलमिल सकते हैं। कुर्सी, आलमारी, कमीज, बटन, स्टेशन, पेन्सिल, बेंच आदि अनगिनत शब्द हैं जो विदेशी भाषाओं से आकर इसके अपने शब्द बन गए हैं।

 

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आवश्यकता : हिन्दी संसार के अनेक विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती है और इसका साहित्य भी विशाल है। इसके अलावा, हिन्दी ने देश में एकता लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उत्तर दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक, भारत के अधिकतर विद्वानों ने भारत की एकता अखंडता के लिए हिन्दी का समर्थन किया है।

इतने अधिक गुणों से भरपूर होकर भी हिन्दी आज अंग्रेजी के पीछे क्या चल रही है? इसका सबसे बड़ा कारण है ऊँचे पदों पर बैठे व्यक्ति जो अग के पुजारी हैं, वे सोचते हैं कि अंग्रेजी न रही तो देश पिछड़ जाएगा।

अंग्रेजी देश की अधिकतर जनता के लिए कठिन है, इसलिए व पर इसके माध्यम से अपना रौब रख सकते हैं। दूसरा कारण है भाषाओं के मन में बैठा भय। उन्हें लगता है कि यदि हिन्दी अधिक क्षेत्रीय भाषाएँ पीछे रह जाएँगी।

 

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जनता वास्तव में ये दोनों विचार गलत हैं। ऊँचे पदों पर बैठे अधिकारी हिन्दी के माध्यम से देश की अधिक सेवा कर सकते हैं और जनता का प्रेम पा सकते है। आज अंग्रेजी क्षेत्रीय भाषाओं को पीछे धकेल रही है। जबकि हिन्दी की एकति किसी को पीछे करने की नहीं, बल्कि मेलजोल की है। यदि हिन्दी का विकास होता है, तो क्षेत्रीय भाषाओं का भी विकास होगा।

 

उपसंहार : भारत की भूमि पर जन्म लेने के नाते हमारा यह कर्त्तव्य है कि हम भारत की भाषाओं के विकास पर बल दें और हिन्दी का विकास करके सभी भाषाओं को जोड़ने का प्रयास करें। तभी हिन्दी सचमुच राष्ट्रभाषा बन पाएगी।

Mukul Dev

मेरा नाम MUKUL है और इस Blog पर हर दिन नयी पोस्ट अपडेट करता हूँ। उमीद करता हूँ आपको मेरे द्वार लिखी गयी पोस्ट पसंद आयेगी।