नक्सलवाद समस्या पर निबंध | Essay on Naxalism Problem in Hindi

आज का निबंध नक्सलवाद समस्या पर निबंध (Essay on Naxalism Problem in Hindi) पर दिया गया हैं आप इस निबंध को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। यहां पर दिया गया निबंध कक्षा (For Class) 4th, 5th, 6th, 7th, 8th, 9th 10th और 12th के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त हैं। विद्यार्थी परीक्षा और प्रतियोगिताओं के लिए इस निबंध से मदद ले सकते हैं।

Essay on Naxalism Problem in Hindi

भूमिका – आज देश के सामने प्रस्तुत कठिन समस्याओं में उग्रवाद की समस्या भयंकर रूप लेती जा रही है। शायद ही कोई दिन होता है जिस दिन उग्रवादी – घटनाएँ नहीं होती। आज यहाँ तो कल वहाँ हत्या, आगजनी, तोड़-फोड़ होती ही रहती है। झारखण्ड, बिहार, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और असम आदि राज्यों के अनेक जिले इस उग्रवाद की चपेट में हैं। सब जगह इसके अपने-अपने नाम हैं, कहीं यह नक्सलवाद कहलाता है, कहीं कोई सेना तो कहीं कोई संगठन। किन्तु काम सबका एक ही है।

 

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उग्रवाद का तात्पर्य है ‘उग्र कार्रवाइयों पर भरोसा’। इसके तहत क्षेत्र विशेष में लगातार हिंसात्मक कार्रवाइयाँ की जाती हैं। कहीं पुलिस बल, पुलिस थाने, प्रशासक और सरकारी भवन इनका निशाना बनते हैं तो कहीं उग्रवाद का विरोध करने वाले गोली से उड़ाए जाते हैं, उनके खेत-खलिहान, घर-द्वार नष्ट किए जाते हैं, रेल की पटरियाँ उखाड़ी जाती हैं, तो कहीं कुछ लोगों के अंग-भंग किए जाते हैं ताकि विरोध करने वालों का मनोबल तोड़ा जाए।

 

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उग्रवाद के पनपने के कारण – देश में उग्रवाद के पनपने के अनेक कारण हैं, जिनमें प्रमुख है गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और न्याय-प्रक्रिया में विलम्ब होने से न्याय पर अविश्वास। कहीं-कहीं क्षेत्रवाद और धार्मिक उन्माद भी आग – में घी का काम करते हैं। अगर समय रहते इस समस्या का निदान नहीं किया गया तो देश की एकता और अखण्डता ही खतरे में पड़ जाएगी। इसी क्षेत्रवाद और अहंमन्यता ने हमें क्या-क्या दुर्दिन दिखाए हैं, इसे नहीं भूलना चाहिए।

 

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उग्रवाद समस्या से छुटकारा – उग्रवाद की समस्या से निजात पाने के लिए सबसे जरूरी है, सरकार की इच्छा-शक्ति क्योंकि आधे-अधरे प्रयत्नों से यह समाप्त न होगी। इसके लिए सर्वतोमुखी कार्य करने होंगे। उग्रवाद में संलग्न व्यक्तियों और संगठनों से निपटने के लिए कठोर कानून बनाने के साथ-साथ प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर जबर्दस्त अंकुश लगाना होगा। सड़क और बिजली गाँव-गाँव तक ले जानी होगी। शिक्षा-संस्थान खोलने होंगे और खेती में सुधार करना होगा।

 

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भूमि-सुधार सख्ती से करना होगा क्योंकि यही आपसी वैमनस्य की जड़ है। आसान किश्तों में देय ऋण का प्रबन्ध करना होगा और दूर-दराज में ऐसे छोटे या मझोले उद्योग-धन्धे शुरू करने होंगे कि लोगों को रोजगार मिले। लोगों को शीघ्र न्याय मिले, इसकी व्यवस्था जरूरी होगी। भूले-भटके लोगों के पुनर्वास की भी व्यवस्था करनी होगी ताकि उनकी मजबूरी का फिर कोई लाभ न उठा सके। साथ ही लोगों को उग्रवादी गतिविधियों के प्रति जागरूक बनाना होगा ताकि फिर कोई उनका शिकार न बने।

 

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समस्या– उग्रवाद देश की व्यवस्था पर एक धब्बा है, जिसे मिटाना हम सबका -कर्त्तव्य है। देश के नेताओं को राजनीतिक भेद-भाव भूलकर, निजी स्वार्थ को तिलांजलि देकर, इस चुनौती का सामना करना आज भी सबसे बड़ी चुनौती है। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो प्रशासन की ऊँची कुर्सियाँ तो इसकी भेंट चढ़ेंगी ही, देश भी रसातल में चला जाएगा।

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