समाचार पत्र पर निबंध | Essay On Newspaper in Hindi

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आज का निबंध समाचार पत्र पर निबंध  (Essay On Newspaper in Hindi) पर दिया गया हैं आप Essay On Newspaper in Hindi को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। यहां पर दिया गया निबंध कक्षा (For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8,9.10 और 12 के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त हैं।

Essay On Newspaper in Hindi

निबंध न 1- 400 शब्द 

समाचार पत्र संसार के दर्पण हैं। जेम्स एलिस मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। जैसे-जैसे उसकी सामाजिकता में विस्तार होता जाता है वैसे-वैसे उसकी अपने समाज के दुःख-सुख या समाचार जानने की इच्छा भी तीव्र होती जाती है। समाचार-पत्र मनुष्य की उसी आकांक्षा के प्रतिरूप हैं।

छापाखाने के आविष्कार के साथ ही समाचार-पत्र की जन्म कथा का प्रसंग आता है। भारत में मुगलकाल में ‘अखबारात-ए-मुअल्ल’ नाम से समाचार-पत्र चलता था। अंग्रेजों के आगमन के साथ-साथ हमारे देश में समाचार-पत्रों का विकास हुआ। सर्वप्रथम 20 जनवरी, 1780 ई० में वारेन हेस्टिंग्स ने ‘इण्डियन गजट’ नामक समाचार-पत्र निकाला। इसके बाद ईसाई प्रचारकों ने ‘समाज दर्पण’, राजा राममोहन राय ने ‘कौमुदी’ तथा ‘चन्द्रिका’, ईश्वर चन्द्र विद्यासागर ने ‘प्रभाकर’ नाम से एक समाचार-पत्र निकाले किन्तु लोकमान्य तिलक का ‘केसरी’ वास्तव में सिंह-गर्जना के समान था। आज तो समाचार-पत्रों की भरमार है।

 

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समाचार-पत्र कई प्रकार के होते हैं, यथा-साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक एवं दैनिक आदि। लेकिन इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण समाचार-पत्र दैनिक समाचार-पत्र है। ये प्रतिदिन छपते हैं और संसार भर के समाचारों के दूत बनकर प्रातः घर-घर पहुंच जाते हैं। साप्ताहिक पत्रिकाओं में विभिन्न विषयों पर लेख, सरस कहानियाँ, मधुर कविताएँ तथा साप्ताहिक घटनाओं का विवरण रहता है। पाक्षिक-पत्र भी विषय की दृष्टि से साप्ताहिक पत्रों के ही अनुसार होते हैं। मामिक-पत्रों में अपेक्षाकृत जीवनोपयोगी अनेक विषयों की विस्तार से चर्चा रहती है। ये साहित्यिक अधिक होते हैं।

 

समाचार-पत्र एक व्यक्ति से लेकर सारे देश की आवाज है जो दूसरे देशों तक पहँचती है। इससे भावना एवं चिन्तन के क्षेत्र का विकास होता है। व्यापारियों के लिए ये विशेष लाभदायक हैं। वे विज्ञापन द्वारा वस्तुओं की बिक्री में वृद्धि करते हैं। इनमें रिक्त पदों की सूचना, सिनेमा जगत् के समाचार, क्रीड़ा जगत् की गतिविधियाँ, वैज्ञानिक उपलब्धियाँ, वस्तुओं के भावों के उतार-चढ़ाव के साथ उत्कृष्ट कविताएँ, चित्र, महापुरुषों के जीवन चरित्र, कहानियाँ, धारावाहिक उपन्यास आदि प्रकाशित होते रहते हैं। समाचार-पत्रों के विशेषांक भी बड़े उपयोगी होते हैं।

 

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लोकतंत्र में समाचार-पत्रों की भूमिका अहम होती है क्योंकि लोगों को जागरूक बनाने में ये अहम होते हैं। जागरूकता पर ही लोकतंत्र टिकता है। इसीलिए इसे चौथा स्तम्भ कहा जाता है। इतिहास गवाह है कि समाचार-पत्रों ने अनेक सम्राटों के मुकुट उतार फेंके हैं।

“खाँचों न कमानों को तलवार न निकाली जहाँ तोप खड़ी हो वहाँ अखबार न निकालो” वस्तुतः सच्चा समाचार-पत्र वह है जो निष्पक्ष होकर राष्ट्र के प्रति अपना कर्तव्य निभाए, जनता के हित को सामने रखे और लोगों को वास्तविकता का ज्ञान कराए। उसमें हंस-सा विवेक हो जो दूध को एक तरफ तथा पानी को दूसरी तरफ कर दे। यह दुराचारियों, अत्याचारियों एवं देश के छिपे शत्रुओं की पोल खोले। यदि समाचार-पत्र अपने कर्तव्य का परिचय दें तो निश्चय ही ये वरदान हैं।

 

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Essay On Newspaper in Hindi

निबंध न 1- 200 शब्द 

 

Mukul Dev

मेरा नाम MUKUL है और इस Blog पर हर दिन नयी पोस्ट अपडेट करता हूँ। उमीद करता हूँ आपको मेरे द्वार लिखी गयी पोस्ट पसंद आयेगी।