वर्षा ऋतु पर निबंध 2021 | Essay on Rainy Season in Hindi

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आज का यह निबंध वर्षा ऋतु पर निबंध (Essay on Rainy Season in Hindi) पर दिया गया हैं आप Essay on Rainy Season in Hindi को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। यहां पर दिया गया निबंध कक्षा (For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8,9.10 और 12 के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त हैं। विद्यार्थी परीक्षा और प्रतियोगिताओं के लिए इस निबंध से मदद ले सकते हैं।

Essay on Rainy Season in Hindi

भूमिका : वर्षा ऋत ही धरती का धन और प्राणियों का जीवन कारण है कि लोगों ने यदि वसन्त को ऋतुओं को राजा कहा है, तो व की रानी कहलाती है। दिनकर के शब्दों में राजा बसन्त, वर्षा ऋतओं रानी।

 

ऋतओं की रानी: जेठ के उत्ताप से धरती झुलसने लगती है, काँम जाते हैं, घर तवा सा जलने लगता है, दिन तो दिन, रात को भी लू चलने ल है। ऐसी द:खदायी स्थिति में वर्षा अपनी ठंडी फुहारें और हरियाली लेकर है। आषाढ के आते ही फुहारें पड़नी शुरू हो जाती हैं और लोग आप हो उठते हैं। किसान हल-बैल लेकर अपने-अपने खेत की ओर चल पटना कृषि कार्यों का शुभारम्भ हो जाता है। खेत जोते और बोये जाने लगते है।

 

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कषि में महत्त्व : आषाढ के बाद आता है मतवाला सावन बँदों की लग जाती है। ताल-तलैया भर जाते हैं, धरती की प्यास बुझ जाती है। में हरियाली का वितान तन जाता है। जिधर देखो उधर ही हरियाली। पेन झुले पड़ जाते हैं और कजरी की धुन हवा में तिरने लगती है सावन और री सखि

 

लाभ : इसके बाद आता है भादो। आकाश में काले-काले बादल और मूसलाधार वर्षा। भादो की रात बड़ी भयानक और डरावनी होती है। हाथ से हाथ नहीं सूझता। चोर चाँदी काटते हैं इन्हीं रातों में इसके बाद आता है क्वार फिर वर्षा रानी की विदाई।

 

हानि : लेकिन कभी-कभी वर्षा मौत का पैगाम लेकर आती है। यति अधिक वर्षा हो गयी तो खेती गयी और बाढ़ आयी। बाढ आती है तो गाँव-शहर तबाह हो जाते हैं। धन और जन की ही नहीं, मवेशियों की भी हानि होती हैं। मकान गिर जाते हैं, फसलें नष्ट हो जाती हैं। यह ठीक है कि वर्षा कभी-कभी मारक बन जाती है किन्तु इसमें जो जीवनदायिनी शक्ति है, उसकी कदापि उपेक्षा नहीं की जा सकती है-यही धरती का श्रृंगार है।

 

उपसंहार : वर्षा को मानव-जीवन का आधार कहा जाता है, क्योंकि जल ही जीवन है। जल न हो तो जीवन न हो, वर्षा न हो तो फसल न हो। दुर्दिन आ जाए। यही कारण है कि वर्षा का सर्वत्र हार्दिक स्वागत होता है।

वर्षा ऋतु पर निबंध हिन्दी में 

निबंध – 2

भारत की सभी ऋतु में वर्षा ऋतु एक अनुपम ऋतु है संसार के बड़े-बड़े कवियों ने वर्षा ऋतु की काफी प्रशंसा की है इस पर अच्छी अच्छी और मार्मिक कविताएं भी लिखी गई है यह रितु संसार को जीवन देती है प्यासे को पानी देती है और और मां की तरह जीव मात्र का पालन पोषण करती है।

 

भारत में गर्मी के ठीक बाद वर्षा ऋतु का आगमन होता है इसके प्रभाव से प्राकृतिक लाला उठती है। यशु के पौधों और पत्तियों में प्राण फूंक देता है चारों ओर हरियाली छा जाती है भिन्न भिन्न प्रकार के पक्षी अपना मधुर ध्वनि से वन और उप वनों की शोभा बढ़ाते हैं।

तालाब के किनारे मेंढक टर टर करने लगते हैं दुबली पतली बताएं बोलकर फैलने लगती है और बीजू से लिपटने लगती है। घने जंगलों में रहने वाले मोर नाचते हैं सारे प्राकृति नया रूप धारण कर नए जीवन का स्वागत करती है सूखी नदियां किनारों को तोड़ती छोड़ती आगे बढ़ती है और कभी-कभी किनारों के पेड़ पौधे को उखाड़ पछाड़ धरसाई कर देती है।

 

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इस ऋतु में ऐसा लगता है कि जैसे किसी ने पूरी धरती पर चादर बिछा दी है खेत खलिहान बाग बगीचे ताल तलैया आहार पोखर सभी भरे पूरे उठते हैं वर्षा के स्वागत में औरतें इंद्र भगवान की पूजा करती हैं। कदम की डाल पर झूले लगाकर झूलती है तथा कजली लावणी और हिलोरा गाती है। अकाश काले मेघा से भर जाता है कभी-कभी बादलों को चीरकर बिजली चमकती है और कभी बादल गरजते हैं।

जब वर्षा की नानी बूंदे छोटे बड़े पदों पर गिरते हैं तब ऐसा लगता है मानो मोती झड़ रहे हो हवा में शीतलता और मस्ती रहती है। गांव के किसान झूम उठे हैं उनके होठों पर मुस्कुराहट दौड़ पड़ते हैं इस प्रकार वर्षा ऋतु मनुष्य और प्रकृति में डाल देती है।

Mukul Dev

मेरा नाम MUKUL है और इस Blog पर हर दिन नयी पोस्ट अपडेट करता हूँ। उमीद करता हूँ आपको मेरे द्वार लिखी गयी पोस्ट पसंद आयेगी।