विज्ञान वरदान या अभिशाप पर निबंध | Essay on Science Boon or Curse in Hindi

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आज का निबंध विज्ञान: वरदान या अभिशाप पर निबंध (Essay on Science Boon or Curse in Hindi) पर दिया गया हैं आप इस निबंध को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। यहां पर दिया गया निबंध किसी भी कक्षा के छात्र के लिए परफेक्ट होगा। आप इस लेख को SSC, UPSC के परीक्षा के लिए प्रयोग में ला सकते है।

Essay on Science Boon or Curse in Hindi
Essay on Science Boon or Curse in Hindi

विज्ञान वरदान या अभिशाप पर निबंध

विज्ञान का अर्थ है विशेष ज्ञान। जब किसी विषय का विशेष ज्ञान होता है तो नयी नयी बातें दिमाग में ज्ञात होती हैं नयी चीजों का निर्माण होता है और नयी नयी खोज होती है।

कविवर दिनकर ने लिखा है-

यह समय विज्ञान का, सब भाँति पूर्ण समर्थ,
खुल गए हैं गूढ संसृति के अमित गुरु अर्थ।

 

निस्सन्देह यह युग विज्ञान का है। इसने थल, जल और आकाश पर अपनी महत्ता स्थापित कर ली है। समय को बहुत हद तक अपनी मुट्ठी में कर लिया है, दूरी पर विजय पा ली है। पहले यात्रा कितनी कठिन थी। लेकिन अब नाश्ता मुम्बई में कीजिए, खाना इंग्लैंड में खाइए, यहा उड़े और वहा पहुँचे। पानी के भीतर चलिए या ऊपर, आपकी मर्जी।  बटन दबाइए और अपने प्रियजन से बातें कीजिए। क्रिकेट या टेनिस का मैच हो या दुनिया के किसी भी कोने में लता मंगेशकर या अमिताभ बच्चन का कार्यक्रम, घर बैठे अपने टेलीविजन सेट पर देखिए।

 

पहले आदमी की जिन्दगी छोटी थी। बीमार पड़ा तो जादू-मंत्र, टोना-टोटका ही सहारा लेता था। अब तो न तपेदिक की चिन्ता है, न हैजा की। मलेरिया और फाइलेरिया दुम दबाकर भाग खड़े हो गये। पोलियो का नामोनिशान मिट रहा है। कुत्ते के काटे का इलाज हो या अगर चीड़-फाड़ कराना है तो निश्चित होकर कराइए। रक्तचाप, मधुमेह तो अब मुट्ठी में है। हृदयाघात की भी चिन्ता नहीं, प्रत्यारोपण कराइए, पेशमेकर लगाइए। विज्ञान कैंसर जैसी बीमारियों का भी इलाज खोज रहा है और उम्मीद है शीघ्र उसपर भी नियंत्रण हो जाएगा।

 

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विज्ञान ने प्रकृति को भी काबू में किया है। आप गर्मी से बेहाल हैं, जाड़े की रात बहुत दुःख दे रही है तो आपको अब न शिमला या मंसूरी जाने की जरूरत है और न आग जलाने की। विज्ञान ने इसका भी इन्तजाम किया है। ‘एयर कंडीशन’ में बैठ जाइए, सारी परेशानियाँ दूर हो जायेंगी। ठंड लगे तो हीटर जला लीजिए ठंड गायब।

 

सचमुच विज्ञान ने क्रान्ति कर दी है। डायनामाइट के आगे पहाड़ भींगी बिल्ली बन जाता है। नदियाँ बाँधी जाने लगी हैं, बंजर धरती अनाज उगलने लगी है। धरती का सीना चीर कर कोयला, सोना, तेल, हीरा निकाल लेता है आदमी। कृत्रिम वर्षा की जाने लगी है। अलबत्ता भूकम्प बेकाबू है।

 

लेकिन यह सब चित्र का एक ही पहलू है। विज्ञान ने विकास के ही नहीं विनाश के दरवाजे भी खोले हैं। टैंक, बम, अणुबम, परमाणुबम, जहरीली गैसें, प्रक्षेपास्त्र भी विज्ञान के चमत्कार हैं, जिनकी शक्ति से सारी मानवता सहमी हुई है। एक ही विस्फोट से नखलिस्तान श्मशान में बदल जाता है। विज्ञान अगर वरदान है तो अभिशाप भी। अब यह हम पर है कि इसे वरदान बनाएँ या अभिशाप।

 

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हमें विज्ञान को मानव-जीवन का वरदान ही बनाना चाहिए। हमें इसके लाभ को जन-जन तक ले जाना चाहिए। अभी इसका लाभ सिर्फ संपन्न ही उठा रहे हैं। हमें विज्ञान का उपयोग इस प्रकार करना चाहिए कि इस संसार में कोई गरीब न रहे, कोई भूखा न मरे और न इलाज के लिए तड़पना पड़े। यही विज्ञान की सार्थकता होगी।

 

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Mukul Dev

मेरा नाम MUKUL है और इस Blog पर हर दिन नयी पोस्ट अपडेट करता हूँ। उमीद करता हूँ आपको मेरे द्वार लिखी गयी पोस्ट पसंद आयेगी।