कश्मीर समस्या पर निबंध | Kashmir Issues Essay in Hindi

आज का निबंध कश्मीर समस्या पर निबंध (Kashmir Issues Essay in Hindi) पर दिया गया हैं आप Kashmir Issues Essay in Hindi को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। यहां पर दिया गया निबंध कक्षा (For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8,9.10 और 12 के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त हैं।

Kashmir Issues Essay in Hindi

Kashmir Issues Essay in Hindi

कश्मीर-समस्या भारत के गले ही हड्डी बन गया है जिसकी आड़ में भारत को तबाह करने का घिनौना खेल चल रहा है। सन् 1947 ई० में जब देश का विभाजन धर्म के नाम पर हुआ तो कश्मीर का भारत के साथ विलय हो गया। चंकि कछ इलाके में मुसलमानो की संख्या अधिक थी, इसलिए पाकिस्तानी सेना ने वहाँ के लोगों की आड में भारतीय भू-भाग पर आक्रमण कर दिया। इसके पहले कि भारतीय सेना कार्रवाई करती कश्मीर का एक भू-भाग दुश्मनों के हाथ आ गया। बाद में युद्ध-विराम हुआ किन्तु तब तक कुछ भू-भाग आक्रामकों के हाथ आ चुका था, अतएव कश्मीर-समस्या उठ खड़ी हुई जो आजतक नहीं सुलझी।

 

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भारत का सबसे उत्तरी राज्य जम्मू कश्मीर पाच हिस्सो मे बटा है जिसमे जम्मु , लघाख, कश्मीर घाटी, गत्लगीर और बटलीस्तान है। इनमे से गिलगाट और बटलीस्तान पालिस्तान के कब्जे मे है। जम्मू और लद्दाख को लेकर कोई बिवाद नही है । जो भी लिवाद है, कश्मीर धारी को लेकर है। कश्मीर विवाद एक अन्तर्राष्ट्रीप विवाद है। जिसे हम कश्मीर समस्या के नाम से जानते हैं।

 

कश्मीर में कुछ अलगावादी तत्व हैं जो पूरे कश्मीर को भारत से अलग करना चाहते हैं। उनका कहना है कि कश्मीर हमारा है। कट्टरपंथी लोग मजहब के नाम पर इसको हवा देते हैं और पाकिस्तानी सेना इनकी सहायता करती है और ये लोग भारत की सीमा में आकर तोड़-फोड़, आगजनी और हत्या करते हैं। इन लोगों के उत्पात के चलते आज कश्मीर के लाखों हिन्दू बेघर होकर, झुग्गी-झोपड़ियों में नर्कीय जिन्दगी बसर करते या फिर राहत शिविरों में किसी तरह जिन्दगी जी रहे हैं। वहाँ के शरारती तत्वों ने हन्दू समुदाय विशेष के लोगों का जीना मुश्किल कर रखा है।

 

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कश्मीर जो कभी स्वर्ग था, आज नरक से बदतर हो गया है वहाँ कोई नहीं जानता कि आतंकवादी की गोली कब उसका कलेजा चाक कर देगी या बम उसके चिथड़े उड़ा देगा। हालत सुधरने के दावे तो बराबर किए जाते हैं लेकिन हकीकत यही है। कश्मीर की समस्या कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहाँ की विधान-सभा के परिसर में बम फूटा है और मंत्रियों एवं विधायकों पर हमले हुए हैं, और लगातार हो रहे हैं। आम नागरिकों और सैनिकों की हत्या तो वहाँ आम बात हो गई है।

 

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कश्मीर-समस्या का कारण हमारी राजनीतिक इच्छा-शक्ति का अभाव भी है, जिसके कारण कठोर कार्रवाई नहीं होती। बातें तो बहुत की जाती हैं लेकिन वोट की राजनीति के कारण कठोर कदम नहीं उठाए जाते। किन्तु अब समय आ गया है कि कश्मीर में घुसे आतंकवादियों और पाकिस्तानियों से इतनी सख्ती से निपटा जाये कि उनकी पीढ़ियाँ भी इधर रुख करने का नाम न लें। अगर तत्काल ऐसा नहीं हुआ तो राजनेताओं को देश कभी क्षमा नहीं करेगा।