Pollution Essay In Hindi | भारत में बढ़ते प्रदूषण पर निबंध

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आज का यह निबंध भारत में बढ़ते प्रदूषण पर निबंध (Pollution Essay In Hindi) दिया गया हैं। आप इस निबंध को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। यहां पर दिया गया निबंध कक्षा (For Class) 5th, 6th, 7th, 8th, 9th, 10th और 12th के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त हैं। विद्यार्थी परीक्षा और प्रतियोगिताओं के लिए इस निबंध से मदद ले सकते हैं।

 

भारत में बढ़ते प्रदूषण पर निबंध

निबंध – 500 शब्द

भूमिका – प्रदूषण एक बहुत बड़ा समस्या बन चूका है। यह सिर्फ हमारे देश का समस्या नहीं है बल्कि एक अन्तर्राष्ट्रीय समस्या है जिसके चपेट में पृथ्वी पर रहने वाले सभी जिव जंतु और अन्य सभी आ गये है इसका प्रभाव चारो तरफ दिखाई दे रहा है।

प्रदूषण का अर्थ है– प्राकृतिक संतुलन में दोष पैदा होना। न शुद्ध वायु मिलना न शुद्ध जल मिलना, न शुद्ध खाद्य मिलना, न शांत वातावरण मिलना। प्रदूषण कई प्रकार का होता है। प्रमुख प्रदृषण हैं-वायु-प्रदूषण, जल-प्रदूषण और ध्वनि-प्रदूषण।

 

वायु-प्रदूषण– महानगरों में यह प्रदूपण अधिक फैला हुआ है। वहाँ चौवीसों घंटे कल-कारखान का धुआँ, मोटर-वाहनों का काला धुआँ इस तरह फैल गया है कि स्वस्थ वायु में सांस लेना दुर्लभ हो गया है। यह समस्या, वहाँ अधिक होती है जहाँ सघन आबादी होती है और वृक्षां का अभाव होता है।

 

जल-प्रदूषण– कल-कारखानों का दूषित जल नदी-नालों में मिलकर भयंकर जल-प्रदूषण पैदा करता है । बार के समय तो कारखानों का दुगंधित जल सब नदी-नालों में घुल-मिल जाता है । इससे अनेक बीमारियाँ पैदा होती हैं।

 

ध्वनि-प्रदूषण मनुष्य को रहने के लिए शांत वातावरण चाहिए। परंतु आजकल कल-कारखानों का शोर, यातायात का शोर, मोटर-गाड़ियों की चिल्ल-यों, लाउडस्पीकरों की कर्णभेदक ध्वनि ने बहरेपन और तनाव को जन्म दिया है।

 

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प्रकृति और मानव पर कुप्रभाव – उपर्युक्त प्रदूषणों के कारण मानव के स्वस्थ जीवन को खतरा पैदा हो गया है। खुली हवा में लंबी साँस लेने तक को तरस गया है आदमी। गंदे जल के कारण कई बीमारियां फसलों में चली जाती हैं जो मनुष्य के शरीर में पहुंचकर घातक बीमारियाँ पैदा करती है। पर्यावरण प्रदूषण के कारण न समय पर वर्षा आती है, न सर्दी-गर्मी का चक्र ठीक चलता है। सूखा, बाढ़ ओला आदि प्राकृतिक प्रकोपों का कारण भी प्रदूषण है।

 

प्रदूषण के कारण – प्रदूषण को बढ़ाने में कल-कारखाने, वैज्ञानिक साधनों का अधिकाधिक उपयोग, फ्रिज, कूलर, वातानुकूलन, ऊर्जा संयंत्र आदि दोषी हैं। वृक्षों को अंधाधुंध काटने से मौसम का चक्रबिगड़ा है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में हरियाली न होने से भी प्रदूषण बढ़ा है। रोकथाम के उपाय-विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों से बचने के लिए चाहिए कि अधिकाधिक वृक्ष लगाए जाएँ, हरियाली की मात्रा अधिक हो। सड़कों के किनारे घने वृक्ष हों। आबादी वाले क्षेत्र खुले हों, हवादार ‘हों, हरियाली से ओतप्रोत हों। कल-कारखानों को आबादी से दूर रखना चाहिए और उनसे निकले प्रदूषित मल को नष्ट करने के उपाय सोचने चाहिए।

 

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उपसंहार – आन सर्वत्र प्रदूषण से बचाव के लिए विभिन्न प्रकार के उपाय किए जा रहे हैं। सरकारी एवं गैर सरकारी स्तर पर विभिन्न संगठनों के द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है कि वे प्रदूषण से मुक्ति हेतु विभिन्न उपाय करें। विद्यालय-स्तर पर भी कई योजनाएँ चलायी जाती हैं, जैसे-जल-संरक्षण, पर्यावरण-संरक्षण आदि। इनका मूल उद्देश्य स्वस्थ जीवन जीने में मानव का सहयोग करना है। ये कार्य इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि आज विकास के साथ-साथ ध्वंस की भी समस्याएँ आ गई हैं। प्रकृति के साथ छेड़-छाड़ होने से प्रकृति प्रदूषित हो गई है। जंगल काटे जा रहे हैं, पहाड़ काटे जा रहे हैं, ये सब हमारे लिए खतरे की घंटी है।

Pollution Essay In Hindi

निबंध – 400 शब्द

प्रस्तावना – प्रदूषण का अर्थ है – वातावरण या वायुमंडल का दूषित होना। प्रदूषण  का समस्या आधुनिक बैज्ञानिक युग की देन है। इस समस्या से विश्व के अधिकांश देश ग्रसित है। प्राकृत ने मानव की जीवन प्रक्रिया को सवस्थ बनाये रखने के लिए उसे शुद्ध वायु, जल और वनस्पति तथा भूमि प्रदान की है परन्तु जब किन्ही कारणों से ये सब दूषित हो जाती है। तो मानव तथा अन्य प्राणियों के स्वास्थ्य के लिए विभिन प्रकार से हानिकारक हो जाती है।

 

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प्रदूषण के प्रकार – प्रदूषण के चार प्रकार के होता है- वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, भूमि प्रदूषण।
आधुनिक युग में आर्थिक प्रगति के नाम पर अनेक प्रकार के छोटे बड़े कल कारखानों और उद्योगो का विकाश मानव ने अपनी भौतिक सुख –  सुविधा को प्राप्त करने के लिए कर लिया है। जनसँख्या ब्रिथि के कारन ग्राम नगर और महा नगर का आकार बढ़ते जा रहा है। वन क्षेत्रो को काट कर आवास की समस्या का समाधान किया जा रहा है। उत्पादन और सुरक्षा के लिए येसे यंत्रो का निर्माण किया जा रहा है जो रातो दिन ध्वनि और धुँआ उगलते रहते है।

 

वायु प्रदूषण – कल – कारखानों का दूषित और अनियत्रित जल-मल  बाहर निकल कर दुर्गन्ध युक्त गैस फैलाता है जो मानव के लिए बहुत घातक है, कारखानों की धुँआ उगलती हुई चिमनयो दूर-दूर तक वातावरण को दूषित करती है, इनसे वायुमदल दूषित होते जा रहा है इससे साँस और फेफड़ो के रोग पनपते जा रहे है।

 

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ध्वनि प्रदूषण– वाहनों और मशीनों का शोर, यातायात के साधनों के हर्नो की चिल्ल – पो, चीखते लाउड स्पीकर, तेज आवाज में चलते टीवी, रेडियो आदि से ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है, इससे सुनाई देना कम हो जाता है, रक्त चाप बढ़ जाता है।

 

जल प्रदूषण– जल स्रोत्त्रो में नहाने कपडे धोने शवो की राख बहाने आदि से भी जल प्रदुषित होता है जिससे हैजा आतशोध तथा पेचिश जैसे रोग हो जाते है।

 

भूमि प्रदूषण– उपज बढ़ाने के लिए भूमि में भिन -भिन प्रकार की रासायनिक खादों को मिलाया जा रहा है जिससे भूमि प्रदूषण होता है एसी प्रदुषित भूमि में उत्पन होने वाला खदान, शाग-सब्जी भी प्रदूषित हो जाती है इनके खाने से मानव के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ते है।

 

हमें प्रयावरण प्रदुषण पर अंकुश लगाना पड़ेगा इसके लिए वनों का अधाधुंन कटाई को रोकना पड़ेगा, वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए वृक्ष लगाना पड़ेगा। जनसंख्या पर नियंत्रण करना पड़ेगा। खतरनाक रासायनिको को कम से कम मात्रा में प्रयोग करना पड़ेगा। अणु बमों के विकाश तथा परीक्षण पर रोक लगानी पड़ेगी तभी आधुनिक सभ्यता में जीने वाले मानव सवस्थ और शुखी जीवन व्यतीत कर सकेगा।

Mukul Dev

मेरा नाम MUKUL है और इस Blog पर हर दिन नयी पोस्ट अपडेट करता हूँ। उमीद करता हूँ आपको मेरे द्वार लिखी गयी पोस्ट पसंद आयेगी।